अगर आपको लगता है कि इंसान ही बेहतर दिखने के लिए किसी का स्टाइल कॉपी करते हैं, तो ज़रा इन बत्तखों की तस्वीरें देख लें. ये देख कर आपको भी यकीन हो जायेगा कि नकलची सिर्फ इंसान ही नहीं होता, ये पक्षी भी नक़ल करने में उतने ही माहिर हैं.
Flamingos अपने शरीर के तापमान का संतुलन बनाये रखने के लिए एक टांग पर खड़े हो जाते हैं. इस तरह ये अपने पूरे शरीर को गर्म रख पाते हैं. इनकी देखा-देखी ये Ducks भी ऐसा ही करने लगी हैं.
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दरअसल, ये Ducks खुद को Flamingo पक्षी समझते हैं, इसलिए उनकी तरह हरकतें करते हैं. ऐसा ये करते भी इतनी सफाई से हैं कि खुद Flamingos को भी लगने लगता होगा कि ये उन्हीं में से एक हैं.
हमारी आसान-सी ज़िन्दगी को और आसान बनाने के लिए वैज्ञानिक हर रोज़ एक नई खोज कर रहे हैं. टेक्नॉलॉजी के बिना हम कुछ भी नहीं सोच सकते. Innovations को प्रोत्साहित करने के लिए दुनियाभर में कई संस्थाएं Innovators या अन्वेषकों को सम्मानित करती हैं. अमेरिका के Massachusetts Institute of Technology (MIT) ने इस साल भारतीय मूल के वैज्ञानिक रमेश रसकर को सम्मानित किया है.
रमेश पहले ऐसे Innovator हैं, जिन्हें अब-तक की सबसे ज़्यादा इनामी राशि मिली है. रमेश को वार्षिक Lemelson-MIT पुरुस्कार में 5 लाख डॉलर मिले हैं. MIT ये पुरुस्कार अमेरिका के वैज्ञानिकों को देती है जो दुनिया को टेक्नोलॉजी के माध्यम से बदलना चाहते हैं.
रमेश MIT के मीडिया लैब में बतौर ऐसोसिएट प्रोफेसर काम कर रहे हैं. इन्हें अल्ट्रा फास्ट इमेजिंग कैमरा, जो कि कोने-कोने तक चीज़ें देख लेता है, कम खर्च में आंखों के इलाज की टेक्नोलॉजी और किताब के आर-पार देखने वाले कैमरे जैसी अनोखी खोज के लिए जाना जाता है.
रमेश नासिक के रहने वाले हैं और कई सालों से अमेरिका में हैं. वो भारत आते रहते हैं और भारत के अन्वेषकों को सपोर्ट करने की पूरी कोशिश करते हैं. साल 2015 में कुम्भ मेले के वक्त उन्होंने 'Kumbhathons' इनोवेशन कैम्प आयोजित किया था, जिसमे कई भारतीय अन्वेषक और व्यापारी शामिल थे. इस कैम्प में छोटे शहरों की यातायात सुविधा, हाउसिंग, सीवेज समेत पूरे विकास के नए विचारों पर चर्चा हुई थी.
रमेश की ये कोशिश Digital Impact Square या DISQ के रूप में सफल हुई. DISQ एक आॅनलाइन प्लैटफॉर्म है जिसका आॅफिस नासिक में हे. ये लोगों की ज़िन्दगी को टेक्नोलॉजी के माध्यम से और बेहतर बनाने के लिए नए Innovators को आमंत्रित और सपोर्ट करती है.
सुनने में आता है कि शाहजहां को जब उसके बेटे औरंगज़ेब ने कैद कर रखा था, तो उसने एक दफ़ा औरंगज़ेब से कहा था कि हिंदू तो अपने मरे हुए बुजुर्गों का भी आदर करते हैं, लेकिन तूने तो अपने ज़िंदा वालिद का ही निरादर किया है.
ओ प्लीज़... बात को यहां हिंदू और मुस्लिम से ना जोड़ें. इस वाक़ये के बारे में ज़िक्र करना बस इसलिए ज़रूरी था, क्योंकि हम यहां पितृ पक्ष की बात करने जा रहे हैं.
आखिर क्या होता है पितृ पक्ष?
भारतीय महीनों की गणना के अनुसार, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश महोत्सव के बाद भाद्र पक्ष माह की पूर्णिमा से ही पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है. अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान दिखाने के लिए ये महापर्व मनाया जाता है. इसे महापर्व इसीलिए बोला जाता है क्योंकि ये सोलह दिनों तक चलता है. शास्त्रों में ये कहा गया है कि जिस प्रकार से शरीर बैकबोन से टिका हुआ है, उसी प्रकार इंसान की बैकबोन उसके पूर्वज हैं. पूर्वजों को याद रखने के लिए यह महापर्व मनाया जाता है. उनका धन्यवाद करने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पितृ पक्ष का महत्व है.
Source: Ibnlive
हिंदू समाज में क्यों है इसका महत्व?
हिंदू शास्त्रों अथवा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज किसी ना किसी रूप में हमारे निकट आते हैं. इस पर्व में अपने पितरों का मान-सम्मान करने के लिए उनका श्राद्ध किया जाता है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए पौत्र या फिर पुत्र द्वारा श्राद्ध करवाया जाता है. पितृ पक्ष में माता-पिता अथवा पूर्वजों के श्राद्ध के कारण शुभ कार्यों की मनाही रहती है, मसलन मकान खरीदना या फिर वाहन खरीदने की मनाही रहती है. गरुड़ पुराण में तो इस बात का ज़िक्र भी मिलता है कि श्राद्ध और तर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती है. इसी कारण इस महापर्व में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. कहा जाता है कि इंसान के जीवन का मूल सुख धन और पुत्र भी पूर्वजों के आशीर्वाद से ही मिलता है. इसलिए पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पितरों को तर्पण करके प्रसन्न करते हैं अथवा उनसे आशीर्वाद की कामना करते हैं.
Source: Amarujala
कब करना चाहिए श्राद्ध?
परपंरा के अनुसार, गर देखा जाये तो दोपहर 12 बजे के आस-पास श्राद्ध करना ठीक रहता है. किसी सरोवर या नदी के किनारे के अलावा अपने घर में भी श्राद्ध किया जा सकता है. पितरों के लिए भात, काले तिल और घी का मिश्रण बनाकर पिंड दान किया जाता है. इस प्रक्रिया के बाद विष्णु भगवान और यमराज की पूजा की जाती है. हिंदू समाज में अपनी तीन पीढ़ी तक के पूर्वजों की पूजा-अर्चना करने की मान्यता है. अपने पूर्वजों का पसंदीदा पकवान बनाकर ब्राह्मण को भोजन करवाया जाता है. उचित दक्षिणा, फल और सम्मान के साथ उन्हें विदा कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है. इसके अलावा यह भी एक मान्यता है कि कौवे और पक्षियों द्वारा श्राद्ध का भोजन ग्रहण करना, सही मायने में पितरों को प्राप्त होता है. मान्यता ये है कि पक्षी पितरों के विशेष दूत होते हैं. गौर करें कि पितृ पक्ष के दौरान घर में प्याज, लहुसन और तामसिक भोजन से पूर्णत: परहेज किया जाता है.
Source: Patrika
विष्णु पुराण में तो ये भी लिखा है कि पितरों को अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों की भूख नहीं होती, बल्कि वो तो भावना के भूखे होते हैं. आप उन्हें जो भी श्रद्धा से देंगे, वो उसे ही स्वीकार कर लेंगे. इसके अलावा गर किसी को अपने माता-पिता, दादा-दादी के इंतकाल की तिथि पता नहीं है, तो वो अमावस के दिन श्राद्ध कर सकता है.
वो घास से लिपटा हरे रंग सा है. वो गुप्प अंधेरे में पड़ रही परछाई की तरह है. वो है पर वो नहीं है, वो नज़रों के सामने रह कर भी छिपा है. जनाब इतने भावुक न होइए! ज़रूरी नहीं कि ये आपकी कल्पना वाला प्यार हो, ये आपकी आंखों की खराबी भी हो सकती है. इस तस्वीर में उल्लू, कुत्ते और बिल्ली के बीच बैठा एक पांडा आपको धोखा दे रहा है.
देखते हैं कि आपकी नज़रें दुरुस्त हैं कि नहीं. ज़रा खोजिए इस पांडा को और लिखिए कमेंट बॉक्स में कि कहां है वो.
कभी उनकी पहचान हॉकी खिलाड़ी के रूप में की जाती थी, लेकिन आज एक किसान के रूप में की जाती है. 1978 के हॉकी वर्ल्ड कप में वे भारतीय हॉकी टीम की शान हुआ करते थे, लेकिन आज दो वक्त की रोटी के लिए खेतों में काम करने मजबूर हैं. इनका नाम विन्सेन्ट लाकरा है, एक दौर था जब सुपर स्टार सुनील दत्त भी इनके फैन थे.
भारत में विन्सेन्ट लाकरा जैसे कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो गुमनामी की ज़िंदगी में अपना गुजर-बसर कर रहे हैं. विन्सेन्ट अब छत्तीसगढ़ के राजगढ़ में एक आदिवासी गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं.
अपनी बदहाली पर विन्सेन्ट कहते हैं
"जब मैं टीम में था, तो सुनील दत्त मेरे दोस्त होने के साथ-साथ मेरे फैन भी थे. एक बार उन्होंने मुझसे मुंबई शिफ्ट होने को कहा था, पर परिवार को कैसे छोड़ता. मेरे पास एक पक्का घर तक नहीं है. गवर्मेंट महीने का सिर्फ पांच हजार देती है. इतने में 11 लोगों का गुजारा नहीं होता, इसलिए खेत में काम करते हैं".
विन्सेन्ट लाकरा एक अच्छे खिलाड़ी के साथ-साथ एक बेहतर इंसान भी हैं. उन्हें सरकार से बस यही शिकायत है कि कम से कम राष्ट्रीय खेल को बढ़ावा तो दिया जाए.
हमारे देश के लोगों के साथ एक प्रॉब्लम है. हमें अपना देश, अपनी भाषा और अपने लोग अच्छे नहीं लगते. अकसर आप लोगों को ऐसा कहते सुन सकते हैं कि विदेश जाकर देखो, तब दुनिया का मतलब समझ आएगा. संभव ये भी हो सकता है कि वो कभी विदेश न गए हों. पर शेखी बघारने के लिए विदेश की सड़कों का, विदेश के लोगों का और वहां की टेक्नोलॉजी का हवाला देने से ऐसे लोग नहीं चुकते. क्या कुछ देशों का हाल तो और भी ज़्यादा बुरा है. चलिए आज चीन की बात करते हैं. चीन हमसे बहुत शक्तिशाली और समृद्ध देश है. जनसंख्या के मामले में चीन विश्व में पहले नंबर पर आता है.
ये आबादी अब चीन के लिए समस्या बनती जा रही है. हम यहां बैठ कर उसकी तरक्की की मिसाल देते फिरते हैं, पर असलियत ये है कि आज चीन में स्थिति बहुत ही चिंताजनक है.
आइये आपको दिखाते हैं कैसे चीन में आबादी बन रही है समस्या?
1. 2013 में एक परीक्षा देने के लिए जाते छात्र.
2. क्लास में कम जगह होने के कारण खुले में परीक्षा देते बच्चे.
3. Wuhan की एक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में सूखते बच्चों के कपड़े.
4. अपने बच्चे से मिलने आये अभिभावक यूनिवर्सिटी के Gymnasium Floor पर सोये हुए.
5. Beijing स्टेशन के बाहर अपनी साइकिल निकालती एक महिला.
6. रश ऑवर में बीजिंग स्टेशन पर जाते लोग.
7. Hangzhou में बिक रहे फ्लैट्स को लेने के लिए जुटी लोगों की भीड़.
8. एक त्यौहार के समय रेलवे स्टेशन पर आई यात्रियों की बाढ़.
9. ट्रेन पकड़ने के लिए प्लेटफार्म पर जाते लोग.
10. चीन के स्थापना दिवस के दिन उमड़ी लोगों की अनियंत्रित भीड़.
11. अपने ग्राहकों का इंतज़ार करते टैक्सी चालक.
12. एक कॉलेज के छात्र जॉब फेयर के दौरान.
13. अपनी सहूलियत के हिसाब से जॉब काउंटर खोजते छात्र.
14. Nanjing में एक सैन्य समारोह में उपस्थित सेना के जवान.
15. सुबह के बाज़ार में सब्जी खरीदने आये लोग.
16. नए साल के समारोह में उपस्थित लोग.
17. Dalian Beach पर गर्मी से बचने आये लोग.
18. आपको शायद न दिख रहा हो, पर ये लोग पानी में हैं.
19. Water Festival में उमड़ी लोगों की भीड़.
20. एक खास दिन बुद्धा मंदिर में पूजा करने आये श्रद्धालु.
21. ज्वार-भाटा देखने के आये लोग पंक्तियों में अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए.
22. बाज़ार में आते-जाते लोग रंगीन बत्तियों की रौशनी में.
23. शाम को Beijing की सड़कों पर भागती हुई गाड़ियां.
इसलिए दूसरे देश की तारीफ़ करने से पहले वहां के हालात को समझ लेना चाहिए. अपना देश जैसा भी है बेहतर है और हमारे लिए सबसे अच्छा है. पर अगर बढ़ती जनसंख्या का कोई उपाय नहीं निकाला गया, तो यहां भी कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिलेगा. इस आर्टिकल को शेयर कर सबको चीन की असली स्थिति से अवगत कराएं.
मिस वर्ल्ड, बॉलीवुड की लीडिंग एक्ट्रेस, अपना म्यूज़िक एल्बम निकालना, फिर हॉलीवुड के बेस्ट शोज़ में नाम कमाना.
'यू लव हर और हेट हर', लेकिन प्रियंका चोपड़ा इतने कम समय में वो सब कर चुकी हैं, जो करने का लोग सिर्फ़ सपना ही देखते हैं. प्रियंका नाम है उस दृढ़ निश्चय का, जो तब तक नही थमता, जब तक मकसद पूरा न हो जाए.
चलिए इस तोड़ू लड़की के बारे में कुछ ऐसी बातें, कुछ ऐसे अचीवमेंट्स जानते हैं, जिन्हें आज तक बॉलीवुड की कोई दूसरी हीरोइन नहीं कर पायी:
1. हॉलीवुड की रॉयल्टी बनना
हॉलीवुड के वो आर्टिस्ट्स, जो अपनी मेहनत और बिना किसी गॉडफादर के नाम बना रहे हैं, हिस्सा बनते हैं W मैगज़ीन की लिस्ट का. इस लिस्ट में कई बड़े नाम, जैसे हेली बेरी, क्रिस इवान्स, कान्ये वेस्ट भी फीचर हो चुके है, जिसमें एक नाम अब प्रियंका चोपड़ा का भी है. ये देसी गर्ल के हार्ड वर्क का नतीजा है कि वेस्टर्न मीडिया उन्हें 'जस्ट अनदर गर्ल फ्रॉम बॉलीवुड' से ज़्यादा आंकता है.
2. अमेरिकी टीवी शो में लीड करैक्टर
आज से पहले बहुत से भारतीय एक्टर हॉलीवुड शोज़ चुके हैं, लेकिन अधिकतर को लीड रोल्स काम ही मिले हैं. प्रियंका ने Quantico में लीड करैक्टर प्ले करते हुए खूब सुर्खियां बटोरी और ये शो काफी चर्चित भी रहा. फिलहाल पिग्गी चॉप्स इसके सेकंड सीजन के लिए शूट कर रही हैं.
3. पहली साउथ एशियाई सेलिब्रिटी जिसे मिला People's Choice Award
Quantico में अपनी जानदार एक्टिंग की वजह से प्रियंका को 'एक नए शो की सबसे फेवरेट एक्ट्रेस' का People's Choice Award मिला और ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय ही नहीं, पहली साउथ एशियाई महिला भी हैं.
4. हॉलीवुड की विलेन भी बन गयी
Baywatch जैसे सुपर फेमस शो के लिए जब प्रियंका का नाम फाइनल हुआ था, तो सब देसी गर्ल के चर्चे करते नहीं थके. लेकिन इससे बड़ी उपलब्धि ये थी कि PeeCee को इस शो के एक मुख्य नेगेटिव रोल के लिए चुना गया, जो आज तक किसी भारतीय को नहीं मिला. ये रोल पहले एक मेल करैक्टर के लिए लिखा गया था, लेकिन जब इस शो के डायरेक्टर की मुलाक़ात प्रियंका से हुई, तो उन्होंने ये रोल को प्रियंका को दे दिया.
5. चार्टबस्टर आर्टिस्ट्स के साथ कर डाली पहली एल्बम
प्रियंका के पहले म्यूज़िक एल्बम 'My City' में उनका साथ दिया था सुपरहिट Will.i.am ने और इस गाने ने आते ही धमाल मचा दिया. इसकी 1,30,000 कॉपियां बिकीं, जो अपनेआप में एक रिकॉर्ड है. इसके लिए भी उन्हें People's Choice Award (Best Debutant) मिला.
6. ऐसी एक्ट्रेस जिसका नाम CBSE की बुक में आया हो
प्रियंका सेलिब्रिटी तो बन ही चुकी हैं, लेकिन CBSE की Environmental Studies की बुक में उनका नाम आना अपने आप में एक Achievement था.
7. सबसे ज़्यादा Brands का चेहरा
किसी सेलिब्रिटी के पीछे बड़े ब्रैंड्स भी तभी भागते हैं, जब वो खुद बहुत अच्छा कर रहा हो. साल 2009 में प्रियंका ने Brand Endorsements के मामले में SRK को भी पछाड़ दिया था. बड़े से बड़े ब्रैंड उनके साथ काम करने को तैयार थे.
8. UNICEF की Goodwill Ambassador बनी
चैरिटी वर्क ज़्यादातार सेलिब्रिटी करते हैं, लेकिन प्रियंका ने अपनी सालाना कमाई का 10 परसेंट ज़रूरतमंद बच्चों के नाम किया है. ये काम वो अपनी चैरिटी फाउंडेशन The Priyanka Chopra Charity Foundation के तहत करती हैं. बच्चों के अधिकारों के लिए किये उनके काम पर उन्हें यूनिसेफ ने अपना Goodwill Ambassador बनाया और ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय अभिनेत्री हैं.
9. Guiness Book of World Records में नाम भी है दर्ज
भले ही प्रियंका की फिल्म व्हाट्स योर राशि बॉक्स ऑफिस पर टिक भी न पायी हो, लेकिन इस फिल्म में अपने 12 कैरक्टर्स से उन्होंने रिकॉर्ड बनाया. ये रिकॉर्ड था, एक ही फिल्म में सबसे ज़्यादा किरदार निभाने का.